शनिवार, 1 नवंबर 2025

मध्यप्रदेश का गठन और सत्ता का रवैया

1 नवम्बर यानी मध्यप्रदेश गठन (स्थापना) दिवस। एक ऐसा दिन जिस दिन भारत का दिल कहे जाने वाले प्रदेश का गठन सन 1956 को हुआ था।

बहुत ही अच्छा और शालीन सा प्रदेश है ये। यहाँ की अधिकतम आबादी गाँवों में बसती है और खेती बाड़ी, पशुपालन जैसी आजीविका पर निर्भर करती है।
आज इसके गठन की खबरें दैनिक भास्कर के ऑनलाइन एप्प पर पढ़ रहा था। जिसकी लिंक यहाँ दे रहा हूँ।


कितने अभागे हैं हम लोग। उस समय जब देश आज़ाद हुआ ही था। न जाने कितने लोगों ने अपने घर वालों के प्राणों को खोया था, और वो आज़ादी मिलने से भी खुश नहीं थे क्योंकि खुशियाँ मनाने के लिए जब परिवार जन ही जीवित न हो तो कैसे खुश हुआ जाए। और हमारे प्रदेश में सत्ता हथियाने का खेल चल रहा था। एक दूसरे को नीचे गिराकर स्वम सत्ता हासिल करना ही लक्ष्य बन गया था। एक मुख्यमंत्री तो पैसे लेकर विधायक के पीछे भाग रहे थे। ये सब क्या है?
जब पूरा देश गरीबी और अंधकार में जी रहा था तब रुपये पैसे से नेता खरीदे जा रहे थे। आज भी यही चला आ रहा है। काश की इन पूर्ववर्ती नेताओं ने अपना ज़मीर नहीं बेचा होता तो आजकल के नेता भी ऐसा करने में शर्म खाते।
आजकल तो एक दल से इस्तीफा दो और अगले दिन दूसरे दल में आ जाओ। कोईं शर्म नहीं, जनता के प्रति कोईं जवाबदेही नहीं।
खैर जो होना होता है वो होता है बहरहाल ये राज्य कर्जे की चपेट में आ गया है और यहाँ के सभी नेताओं से मैं अपील करना चाहता हूँ कि आप सभी मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा लिखित गबन का अध्ययन करें। इस प्रदेश को कर्ज से बाहर निकालने का प्रयत्न करें ना कि रेवड़ियाँ बांटकर वोट लेने का संघर्ष।
संघर्ष वही याद रहता है जिसके पीछे कुछ सच्चा पाने की चाहत होती है। 
फिर एक बार सभी को मध्यप्रदेश गठन की शुभकामनाएं।🙏