शनिवार, 9 जुलाई 2022

विधर्मी आग

हमारा भारत देश अपनी सांस्कृतिक विरासत, सहृदयता, करुणा एवं सर्वधर्म समभाव के लिए विश्व विख्यात है। हमेशा भारत ने शांति मार्ग को चुनते हुए कठिन से कठिन परिस्थितियों से पार पाया है। हमने कभी भी युद्ध मार्ग का अनुसरण या युद्ध की पहल नहीं की। हमने उन सभी विदेशियों जो किसी भी कारणवश हमारे देश आए हैं, उनके मन मस्तिष्क पर एक अमिट छाप छोड़ी है। "जो भारत आया भारत का हो गया"। हमारा दर्शन शास्त्र है ही इतना महान। लेकिन आज का समय कुछ अलग है। आज जब हम 21वीं शताब्दी में हैं, भारत के लोगों ने 'भारत की खोज' करना प्रारंभ कर दिया है। जो बहुत अच्छी बात भी है। लोगों ने ग्रंथों को पढ़ना शुरू किया भारतीय विरासत को जिंदा करने का विचार फिर से लोगों के मन में आया। यह भी इसलिए कि कुछ जगह भारतीयों को इतिहास गलत समझाया गया या बताया गया। लेकिन यह सभी के लिए सही नहीं था। भारत पर वर्षों मुगलों का राज रहा और कई आक्रांताओं और राजाओं ने अपने मन मुताबिक शहरों के नाम बदल दिए यहां तक कि बाजारों के नाम भी। जब आज की पीढ़ी को यह बात समझ आई और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी उन्हें साथ दिखी तो इन नामों को बदलना शुरू हो गया। ऐतिहासिक गलतियों का सुधार कार्य पुनः शुरू हुआ। कई जगहों पर मुस्लिम शासकों के नाम पर रखे शहरों के नाम हिंदी में उनकी संस्कृति के हिसाब से बदले जा रहे हैं। एक तरह से यह बिल्कुल सही लगता है, लेकिन परिवर्तन हर किसी को आसानी से हजम नहीं होता। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब जब जिसकी सता रही उसके हिसाब से देश चला और आगे भी निरंतर ऐसे ही चलता रहेगा। औरंगजेब ने मंदिरों को तुड़वाया और उसकी शक्ति के आगे किसी की ना चली और आज मंदिर फिर से बन रहे हैं। 'यथा राजा तथा प्रजा'। कुछ लोगों को लगा कि हम गलत इतिहास पढ़ रहे हैं इसे बदलने की जरूरत है। लेकिन कुछ लोगों ने नया इतिहास भी बनाने की कोशिश की जो बिलकुल सही नहीं है, और उसी वजह से धार्मिक उन्माद बढ़ने लगा। पहले लोग एक दूसरे के धर्म को अपमानित करते रहे अभी दूसरे के देवी देवताओं का भी अपमान करना शुरू कर दिया। अति तब हुई जब इन बातों का संज्ञान विदेशों विदेशी सरकारों ने भी लिया और भारत सरकार को चिट्ठी लिखकर कुछ करने का आग्रह किया। भारत सरकार भी क्या करे, अभिव्यक्ति की आजादी जो है और लोग इसी आजादी का फायदा उठाते हैं। लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी अपनी मर्यादा में रहकर ही आपको मिली है। अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में आप इस तरह के बयान बाजी या इस तरह के कर्म नहीं कर सकते जो दूसरों के लिए घातक सिद्ध हो। कुछ दिनों पहले एक महिला फिल्मकार ने माता काली को फिल्म के पोस्टर में सिगरेट पीते हुए बताया और वह मानती हैं की माता काली का यह स्वरूप मेरे लिए बिल्कुल सही है। एक महिला भी धूम्रपान कर सकती है क्योंकि पुरुष करते हैं। यह आपकी अपनी पसंद है इसे जानबूझकर आप सब पर मत थोपिए और कम से कम देवी-देवताओं पर तो नहीं। यह लोग सिर्फ प्रसिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं चाहे वह अच्छी तरीके से हो या गलत तरीके से हो और गलत तरीके से प्रसिद्धि बहुत जल्दी मिलती है। लेकिन सस्ती प्रसिद्धि के कारण देश में जो हालात पैदा हो रहे हैं वह काफी खतरनाक है।
एक देश जहां सारे धर्म एक साथ प्रेम भाव से रहते हैं, वहां इन सभी धर्मों के बीच एक विधर्मी आग आ गई है और कड़वाहट लगातार बढ़ती जा रही है। समय रहते यदि इस उन्माद को कम नहीं किया गया तो यह आग जंगल की आग से भी खतरनाक साबित होगी और इसमें क्या-क्या जलेगा और क्या-क्या बचेगा इसका ठीक-ठीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसलिए यह हम सभी भारत वासियों का कर्तव्य है कि हम समझे कि हमारा धर्म क्या है और उसका अनुसरण करते समय यह भी ध्यान रखें कि उसमें क्या चीजें सही हैं, क्या चीजें गलत है। आज हर तरफ कट्टरवाद की बातें होती हैं। बहुत से देशों में अल्पसंख्यक समाज कट्टर होता है लेकिन जहां-जहां बहुसंख्यक समाज कट्टर हुआ है वहां प्रलय आता है। इसीलिए हमें इस बात की तैयारी रखनी होगी कि हमारे देश का नाम जो आज तक प्रेम भाव के लिए जाना जाता है वह इसी तरह जाना जाए और यह विधर्मी आग और आगे ना बढ़े। धन्यवाद

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