रविवार, 2 जनवरी 2022

समय की निरंतरता

समय....... इतना कहा ही और समय आगे बढ़ गया। समय रुकता नहीं बस चलता रहता है, निरन्तर, एक ही प्रवाह में, एक ही गति में, बिना विश्राम लिए। 
समय अकेला ही ऐसा है जो कि सबसे आगे है उससे आगे कोईं नहीं, उसे ना कोईं बदल पाया न कोईं पीछे छोड़ पाया।
समय को किसी से कुछ लेना नहीं, किसी को कुछ देना नहीं। बस चलते रहना है। 
ऐसा लगता है जैसे समय में कोईं भावनाएं ही नहीं, कोईं जन्मा खुशी नहीं, कोईं मरा दुख नहीं... वह बस आगे चलता रहता है।
वो न तो रसपूर्ण है, न नीरस है। उसका कोईं ध्येय भी नहीं, कोईं लक्ष्य नहीं, कोईं चाह या लालसा नहीं, उसे बस एक गति में चलना है और इस कार्य में वह पूरी तरह सक्षम है। वह इस कार्य को किसी लगन से या दिल लगाकर नहीं कर रहा, न ही बिना लगन से कर रहा है, उसे बस चलना है और वो चल रहा है। 
युग बदले, दशक बदले, सदियाँ बदली उसे कोईं फर्क नहीं पढ़ा, वो वृद्ध नहीं हुआ पर इसका अर्थ ये नहीं की वह युवा है।
उसके सामने ब्रह्मांड बना वो बढ़ता रहा, प्रभु श्री राम ने जन्म लिया वो चलता रहा, श्री कृष्ण जन्मे वो थमा नहीं, जीजस क्राइस्ट, बुद्ध, महावीर और कितने ही महानुभाव जन्में उसकी निरंतरता न तो रुकी न ही उसकी कोईं लालसा जन्मी। 
न वो किसी का मित्र है न ही किसी का शत्रु है। उसकी किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं। 
देश बने, सरकारें बनी, सरकारें गिरी, युद्ध हुवे लेकिन वो निरंतर, निष्कपट, समान वेग से चलता रहा। उसे अपने चलने के कर्म में कोईं आसक्ति नहीं है। 
इसीलिए कहा जाता है "समय बड़ा बलवान"

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

👌👌बहुत खूब भय्या