शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2022

धर्म और प्रेम का सम्बन्ध (Relation of Dharm & Prem)

धर्म का सीधा संबंध समाज से, प्रकृति से, लोगों से प्रेम करना है, लोगों को समझना है। जहां धर्म है वहां प्रेम है। धर्म अर्थात सच्चाई के रास्ते पर चलना। धर्म को आजकल लोग संप्रदाय समझते हैं, लेकिन संप्रदाय बहुत बाद में बने हैं। जो व्यक्ति सत्य के साथ खड़ा है, वही धर्म के साथ है, और जो सच के साथ नहीं है वह अधर्मी है, और जो व्यक्ति सत्य के साथ खड़ा होगा वही लोगों को प्यार कर सकता है, भावनात्मक रूप से लोगों से जुड़ सकता है उन्हें प्रेम कर सकता है। इसलिए इस दुनिया में प्रेम तभी तक जीवित है जब तक लोग धर्म को अपनाते हैं। 
 "जिस दिन धर्म खत्म हो गया, उस दिन इस दुनिया में प्रेम नहीं होगा।"

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